
खबरों के मुताबिक 20 वर्ष पहले भगवानदास यादव का खेती की जमीन को लेकर गांव के दबंग ठाकुरों से विवाद हुआ था। इस विवाद के चलते ठाकुर हरवल सिंह ने भगवानदास और उसके छोटे भाई लाड़ले पर जानलेवा हमला किया था। इसमें भगवानदास के कान में गंभीर चोट आई थी, जिससे उसे सुनाई देना बंद हो गया, वहीं छोटे भाई को परिवार वालों ने गांव से शहर भेज दिया।
घटना के बाद से ही दंबगों के खिलाफ भगवानदास के सिर पर खून सवार था, जिसके कारण परिवारवालों ने जंजीरों में जकड़कर उन्हें कैद कर दिया गया था। अब भगवानदास की उम्र 60 के पार हो चुकी है। परिजनों ने उसकी चारपाई के पास ही शौचक्रिया एवं खाने का इंतजाम किया हुआ है।
कई दशक से लगातार बैड़ियों में कैद होने के कारण बुजुर्ग भगवानदास चिड़चिड़ा हो गया। इससे परिवार वालों को डर रहता है कि कही कोई बड़ी घटना को अंजाम न दे दे। इसी डर से तब से अब तक भगवानदास को लगातार कैद में रखा जाता है।
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