Friday, 18 May 2018

कमलनाथ ने अपने पटवारी को दी पॉवर, सिंधिया के रावत को लूपलाइन


भोपाल। कल ही ज्योतिरादित्य सिंधिया ने जयवर्धन सिंह का न्योता स्वीकार करके एकजुटता की आवाज बुलंद की थी और ठीक उसी समय कमलनाथ कांग्रेस के बजाए अपने गुट को मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रहे थे। उन्होंने मप्र के 4 कार्यवाहक अध्यक्षों के बीच कार्यविभाजन कर दिया है। कमलनाथ गुट के सबसे लोकप्रिय नेता जीतू पटवारी को युवाओं और किसानों को साधने का जिम्मा सौंपा गया है। बाला बच्चन को आदिवासी और सुरेंद्र चैधरी दलित दिए गए हैं। एकमात्र सिंधिया समर्थक रामनिवास रावत को संगठन को मजबूत करने के साथ एनजीओ और चुनाव आयोग से जुड़ीं गतिविधियों की जिम्मेदारी दी गई है। एक तरह से लूपलाइन में डाल दिया गया है। बतौर कार्यवाहक अध्यक्ष जनता से मिलने का मौका ही छीन लिया। 

कमलनाथ के अध्यक्ष बनने के बाद से ही इंतजार था कि कब वे अपनी संगठनात्मक जमावट को अंजाम देंगे। इसकी शुरूआत उन्होंने गुरुवार को कर दी। दूसरी ओर पूर्व मुख्यमंत्री व कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने भी कमलनाथ के लिए काम शुरू कर दिया है। बता दें कि प्रदेशअध्यक्ष कमलनाथ के पीछे दिग्विजय सिंह पूरी ताकत से खड़े हैं। प्रदेश कांग्रेस दफ्तर में उन्होनें गुरुवार को कमलनाथ के साथ अनुसूचित जाति विभाग के पदाधिकारियों की बैठक ली।

किसको-क्या जिम्मेदारी
बाला बच्चन -आदिवासियों के कार्यक्रमों का आयोजन, सारे कर्मचारी संगठन, आदिवासी क्षेत्रों में कार्यरत सभी एनजीओ और इंटक का काम। 
रामनिवास रावत -सेवादल व प्रशिक्षण, पिछड़ा वर्ग विभाग, एनजीओ समन्वय, चुनाव आयोग से संबंधित सूचना और विधि प्रकोष्ठ व चुनाव प्रचार अभियान का समन्वय। 
जीतू पटवारी - आंदोलन व धरना प्रदर्शन की कार्ययोजना और क्रियान्वयन, युवा कांग्रेस, एनएसयूआई, महिला व किसान कांग्रेस के कार्यक्रमों का आयोजन व समन्वय। 
सुरेंद्र चैधरी -अनुसूचित जाति, अल्पसंख्यक कार्यक्रम समन्वय व क्रियान्वयन, अजा वर्ग से संबंधित सभी एनजीओ का काम देखेंगे।

इस बंटवारे का क्या असर होगा
इस बंटवारे से सुरेन्द्र चैधरी और बाला बच्चन को वो सबकुछ मिल गया जो उन्हे चाहिए था। दोनों पहले भी अपने क्षेत्र में काम कर रहे थे। अब कार्यवाहक अध्यक्ष के तौर पर करेंगे लेकिन कार्यविभाजन का सबसे ज्यादा फायदा जीतू पटवारी को मिला। कमलनाथ के बाद वो प्रदेश के दूसरे सबसे ताकतवर नेता हो गए। इसके साथ ही मीडिया की सुर्खियों में भी पटवारी ही सबसे ज्यादा रहेंगे क्योंकि उनको कांग्रेस की पूरी फ्रंटलाइन दे दी गई है। रामनिवास रावत को कांग्रेस का बाबू बना दिया गया। एक क्लर्क की तरह उनकी टेबल पर बहुत सारी फाइलें होंगी और संगठन के कुछ लोग सामने खड़े होंगे। रामनिवास रावत एक सफल किसान नेता हैं परंतु उनसे उनका किसान छीनकर चुनाव आयोग थमा दिया गया। 

घरवापसी के लिए समिति गठित
कमलनाथ ने छह सदस्यीय समन्वय समिति भी गठित कर दी। समिति कांग्रेस में फिर से प्रवेश के लिए प्राप्त आवेदन पर विचार कर अपना अभिमत कमलनाथ को देगी। इस समित में पूर्व मंत्री इंद्रजीत कुमार पटेल को संयोजक बनाया गया है। इनके अलावा पूर्व सांसद सत्यनारायण पंवार, पूर्व विधायक विश्वेश्वर भगत, पूर्वमंत्री नर्बदाप्रसाद प्रजापति, भारत सिंह जावरा, चंद्रकुमार भनोट सदस्य रहेंगे।

लौटकर आए कमलनाथ ने कहा अब बस 90 दिन हैं
कमलनाथ ने गुरुवार को कहा कि भाजपा की नीयत और डीएनए क्या है यह बात लोगों तक पहुंचानी होगी। हमारे पास समय बहुत कम है और यह देखना है कि 90 दिनों में क्या संभव है। कार्यकर्ताओं को देखना होगा कि कहां उनके प्रभाव से रणनीति सीट में बदल सकती है। उन्होंने कहा कि सरकार से हर वर्ग परेशान है।कमलनाथ के अध्यक्ष बनने के बाद से ही इंतजार था कि कब वे अपनी संगठनात्मक जमावट को अंजाम देंगे। इसकी शुरूआत उन्होंने गुरुवार को कर दी। दूसरी ओर पूर्व मुख्यमंत्री व कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने भी कमलनाथ के लिए काम शुरू कर दिया है। बता दें कि प्रदेशअध्यक्ष कमलनाथ के पीछे दिग्विजय सिंह पूरी ताकत से खड़े हैं। प्रदेश कांग्रेस दफ्तर में उन्होनें गुरुवार को कमलनाथ के साथ अनुसूचित जाति विभाग के पदाधिकारियों की बैठक ली।

किसको-क्या जिम्मेदारी
बाला बच्चन -आदिवासियों के कार्यक्रमों का आयोजन, सारे कर्मचारी संगठन, आदिवासी क्षेत्रों में कार्यरत सभी एनजीओ और इंटक का काम। 
रामनिवास रावत -सेवादल व प्रशिक्षण, पिछड़ा वर्ग विभाग, एनजीओ समन्वय, चुनाव आयोग से संबंधित सूचना और विधि प्रकोष्ठ व चुनाव प्रचार अभियान का समन्वय। 
जीतू पटवारी - आंदोलन व धरना प्रदर्शन की कार्ययोजना और क्रियान्वयन, युवा कांग्रेस, एनएसयूआई, महिला व किसान कांग्रेस के कार्यक्रमों का आयोजन व समन्वय। 
सुरेंद्र चैधरी -अनुसूचित जाति, अल्पसंख्यक कार्यक्रम समन्वय व क्रियान्वयन, अजा वर्ग से संबंधित सभी एनजीओ का काम देखेंगे।

इस बंटवारे का क्या असर होगा
इस बंटवारे से सुरेन्द्र चैधरी और बाला बच्चन को वो सबकुछ मिल गया जो उन्हे चाहिए था। दोनों पहले भी अपने क्षेत्र में काम कर रहे थे। अब कार्यवाहक अध्यक्ष के तौर पर करेंगे लेकिन कार्यविभाजन का सबसे ज्यादा फायदा जीतू पटवारी को मिला। कमलनाथ के बाद वो प्रदेश के दूसरे सबसे ताकतवर नेता हो गए। इसके साथ ही मीडिया की सुर्खियों में भी पटवारी ही सबसे ज्यादा रहेंगे क्योंकि उनको कांग्रेस की पूरी फ्रंटलाइन दे दी गई है। रामनिवास रावत को कांग्रेस का बाबू बना दिया गया। एक क्लर्क की तरह उनकी टेबल पर बहुत सारी फाइलें होंगी और संगठन के कुछ लोग सामने खड़े होंगे। रामनिवास रावत एक सफल किसान नेता हैं परंतु उनसे उनका किसान छीनकर चुनाव आयोग थमा दिया गया। 

घरवापसी के लिए समिति गठित
कमलनाथ ने छह सदस्यीय समन्वय समिति भी गठित कर दी। समिति कांग्रेस में फिर से प्रवेश के लिए प्राप्त आवेदन पर विचार कर अपना अभिमत कमलनाथ को देगी। इस समित में पूर्व मंत्री इंद्रजीत कुमार पटेल को संयोजक बनाया गया है। इनके अलावा पूर्व सांसद सत्यनारायण पंवार, पूर्व विधायक विश्वेश्वर भगत, पूर्वमंत्री नर्बदाप्रसाद प्रजापति, भारत सिंह जावरा, चंद्रकुमार भनोट सदस्य रहेंगे।

लौटकर आए कमलनाथ ने कहा अब बस 90 दिन हैं
कमलनाथ ने गुरुवार को कहा कि भाजपा की नीयत और डीएनए क्या है यह बात लोगों तक पहुंचानी होगी। हमारे पास समय बहुत कम है और यह देखना है कि 90 दिनों में क्या संभव है। कार्यकर्ताओं को देखना होगा कि कहां उनके प्रभाव से रणनीति सीट में बदल सकती है। उन्होंने कहा कि सरकार से हर वर्ग परेशान है।

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