गुरुवार, 12 फ़रवरी 2026

देवास में 8 करोड़ से ज्यादा का सहकारी घोटाला, किसानों के नाम पर फर्जी लोन-बीमा खेल, EOW ने दर्ज किया मामला | Kosar Express


  • ईओडब्ल्यू ने 8 करोड़ से अधिक राशि की धोखाधड़ी करने पर राजोदा प्राथमिक कृषि सहकारी साख संस्था व जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक के अधिकारियों के विरुद्ध किया पंजीबद्ध अपराध
  • आरोपी अधिकारियों द्वारा किसानों के पास उपलब्ध वास्तविक भूमि से 400 हेक्टेयर अधिक भूमि दर्शाकर वास्तविक पात्रता से 5 करोड़ रुपये से अधिक राशि का ऋण नियम विरुद्ध तरीके से वितरित किया गया
  • एक ही सीजन में किसानों की फसल का एक से अधिक बार बीमा कर 65 लाख रुपये से अधिक के क्लेम स्वीकृत कराकर राशि प्राप्त की गई
  • सचिव ने किसानों के खातों से विड्रॉल पर स्वयं हस्ताक्षर कर 1 करोड़ रुपये से अधिक का आहरण किया गया


आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ मुख्यालय भोपाल में पंजीबद्ध शिकायत क्रमांक-278/19 का उज्जैन इकाई के द्वारा सत्यापन करने पर पाया कि वृहताकार प्राथमिक कृषि सहकारी समिति मर्यादित राजोदा जिला देवास एवं जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक मर्यादित देवास के अध्यक्ष, प्रबंधक, सचिव व पर्यवेक्षक ने मिलकर वर्ष 2016-2019 के बीच समिति के सदस्य किसानों की जानकारी के बिना उनकी पात्रता से अधिक ऋण स्वीकृत कर शासन की विभिन्न ऋण माफी व बीमा योजनाओं का लाभ उक्त ऋण खातों में प्राप्त दिखा, किसानों के खातों से अवैध रूप से करोड़ों रुपये निकाल लिये। आरोपियों द्वारा शासन, बैंक व किसानों के साथ धोखाधड़ी व आपराधिक न्यासभंग करना पाए जाने से उनके विरुद्ध आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ मुख्यालय भोपाल द्वारा अपराध पंजीबद्ध किया गया।


आरोपी-

1. महेश जैन तत्कालीन सचिव एवं सहायक प्रबंधक वृहताकार प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति मर्यादित राजोदा तहसील एवं जिला देवास

2. दिलीप नागर तत्कालीन पर्यवेक्षक वृहताकार प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति मर्यादित राजोदा तहसील एवं जिला देवास

3. अनिल दुबे तत्कालीन शाखा प्रबंधक शाखा मंडी प्रांगण जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक मर्यादित देवास

4. श्रीमती रामकन्या बाई पति तंवरसिंह चौहान, अध्यक्ष वृहताकार प्राथमिक कृषि सहकारी साख संस्था मर्यादित राजोदा जिला देवास म.प्र.

5. अन्य

➤ अपराध- आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ उज्जैन इकाई के द्वारा शिकायत क्रमांक-278/19 के सत्यापन पर आरोपियों के द्वारा योजनाबद्ध तरीके से मिलकर निम्नानुसार धोखाधड़ी करना पाया गया:-


किसानों के पास उपलब्ध भूमि अनुसार उनकी साख सीमा निर्धारित कर उन्हें ऋण दिया जाना था। आरोपियों ने स्वयं के लाभ के लिये सदस्य किसानों के पास उपलब्ध भूमि से वर्ष 2016-2017 में 139 हेक्टेयर, वर्ष 2017-2018 में 129 हेक्टेयर व वर्ष 2018-2019 में 137 हेक्टेयर भूमि अधिक दर्शाकर पात्रता से साढ़े पांच करोड़ रुपये अधिक ऋण किसानों की जानकारी के बिना स्वीकृत किये।


किसानों की साख सीमा बिना स्वीकृत किये उक्त तीन वर्षों में तीन करोड़ रुपये से अधिक का ऋण प्रदान किया गया है। 300 किसानों का कृषि बीमा उनकी सामान्य साख सीमा स्वीकृत किये बिना या एक ही फसल का एक वर्ष में एक से अधिक बार कृषि बीमा कर 65 लाख रुपये की बीमा राशि आरोपियों द्वारा अवैध रूप से प्राप्त कर ली गयी, जिसके लिये किसानों के आवेदनों में स्वयं के मोबाइल नम्बर आरोपियों द्वारा लेख करना पाया गया।


आरोपियों द्वारा उपरोक्तानुसार बिना किसानों की जानकारी के नियम विरुद्ध स्वीकृत ऋण खातों में शासन की मुख्यमंत्री ऋण माफी योजना की राशि व ब्याज सब्सिडी का इंद्राज कर शासन को अधिक हानि कारित की।


वृहत्ताकार प्राथमिक कृषि सहकारी समिति के सचिव महेश जैन ने किसानों के खातों में स्वीकृत ऋण राशि के विड्रॉल पर्ची पर स्वयं हस्ताक्षर कर 1 करोड़ 12 लाख रुपये अवैध रूप से निकाल लिये। समिति की केशबुक में 20 लाख रुपये से अधिक की अनियमितता ऑडिट दल द्वारा प्रमाणित पाया गया।


इस तरह वृहत्ताकार प्राथमिक कृषि सहकारी समिति के आरोपी अधिकारी महेश जैन तत्कालीन सचिव एवं सहायक प्रबंधक, श्रीमती रामकन्या बाई पति तंवरसिंह चौहान ने जिला सहकारी बैंक के आरोपी अधिकारी दिलीप नागर तत्कालीन पर्यवेक्षक, अनिल दुबे तत्कालीन शाखा प्रबंधक, अध्यक्ष एवं अन्य के साथ मिलकर धोखाधड़ी व आपराधिक न्यासभंग कर शासन, बैंक व किसानों को करोड़ों रुपये की आर्थिक हानि कारित कर स्वयं को आर्थिक लाभ पहुंचाना प्रथमदृष्टया प्रमाणित पाया गया जिस पर आरोपियों के विरुद्ध धारा 420, 409, 467, 468, 471, 201, 120 बी भादवि एवं 13(1)(क), 13(2) भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 एवं धारा 13(1)(d), 13(2) भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) अधिनियम 2018 का अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया है।

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