Wednesday, 25 April 2018

नाबालिग दुष्कर्म केस: साढ़े चार साल बाद आसाराम दोषी करार, आज ही हो सकता है सजा का एलान

आसाराम के खिलाफ रेप, गिरोह बना कर दुष्कर्म और यौन शोषण के लिए उनका अवैध व्यापार करने जैसे आरोप थे।



- आगे क्या: 1696 दिन से जेल में बंद आसाराम इस फैसले के खिलाफ राजस्थान हाईकोर्ट में गुहार लगा सकता है
- फैसले की कॉपी तुरंत नहीं मिली तो हाईकोर्ट में सुनवाई में वक्त लग सकता है
- गुजरात में आसाराम के खिलाफ दुष्कर्म का एक और केस है, वहां मुकदमा लंबित होने के चलते वह बाहर नहीं आ सकेगा

जोधपुर. नाबालिग शिष्या से दुष्कर्म के मामले में आसाराम (80) को दाेषी करार दिया गया है। विशेष एससी-एसटी कोर्ट के जज मधुसूदन शर्मा ने बुधवार सुबह सेंट्रल जेल में कोर्ट लगाकर अपना फैसला सुनाया। जोधपुर की जेल में बंद आसाराम के दो सहयोगियों को भी दोषी ठहराया गया। सजा का एलान आज ही हो सकता है। फैसले और सजा के खिलाफ आसाराम राजस्थान हाईकोर्ट में अपील कर सकता है। आसाराम को कम से कम 10 साल की सजा हो सकती है। प्रावधान उम्रकैद तक का है। इंदिरा गांधी के हत्यारों, आतंकी अजमल आमिर कसाब और डेरा प्रमुख गुरमीत राम-रहीम के केस के बाद ये देश का चौथा ऐसा बड़ा मामला है, जब जेल में कोर्ट लगी और वहीं से फैसला सुनाया गया। पॉक्सो एक्ट के तहत भी ये पहला बड़ा फैसला है।
सजा पर बहस पूरी
- आसाराम को गिरोह बनाकर दुष्कर्म करने के मामलों में लगने वाली धारा 376डी के तहत सजा होगी। इस पर बहस पूरी हो गई है।
- अगर गिरोह का एक भी सदस्य दुष्कर्म करता है तो इसे सामूहिक दुष्कर्म माना जाएगा। इसमें 10 साल तक की सजा का प्रावधान है।
- पॉक्सो एक्ट के तहत बनाई गई कोर्ट जिला और सेशन कोर्ट स्तर की होती है। ऐसे में अब फैसले और सजा के खिलाफ अपील सीधे हाईकोर्ट में होगी।
- आसाराम की प्रवक्ता नीलम दुबे ने कहा कि हम अपनी कानूनी टीम से सलाह लेंगे। इसके बाद ही आगे की रणनीति तय होगी। हमें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है।
आसाराम ने जज को 15 मिनट इंतजार कराया
- आसाराम कोर्ट रूम में वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग कैमरा के सामने 15 मिनट देरी से पहुंचा। वह पूजा कर रहा था।
- सामने आकर जज से कहा, "क्षमा करें प्रभु भक्ति में लीन था।"
फैसले की सबसे बड़ी कड़ी : पीड़ित लड़की का अपने बयान पर टिके रहना
1) दुष्कर्म की शिकार लड़की उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर की रहने वाली है। आसाराम के समर्थकों ने उसे और उसके परिवार को बयान बदलने के लिए बार-बार धमकाया।
2) उत्तर प्रदेश से बार-बार जोधपुर आकर केस लड़ने के लिए उसके पिता को ट्रक तक बेचने पड़े।
3) आसाराम के खिलाफ गवाही देने वाले नौ लोगों पर हमला हुआ। तीन गवाहों की हत्या तक हुई। जान गंवाने वालों में लड़की के परिवार के करीबी दोस्त भी थे।
4) कोर्ट को भी गुमराह करने की कोशिशें हुईं। जांच अधिकारी को बचाव पक्ष के वकीलों ने बार-बार कोर्ट में बुलवाया। एक गवाह को 104 बार बुलाया गया।
5) आसाराम की तरफ से लड़की पर अपमानजनक आरोप लगाए गए। ये तक कहा गया कि मानसिक बीमारी के चलते लड़की की पुरुषों से अकेले मिलने की इच्छा होती है।
6) फिर भी 27 दिन की लगातार जिरह के दौरान पीड़ित लड़की अपने बयान पर कायम रही। उसने 94 पन्नों में अपना बयान दर्ज कराया।
7) आसाराम के वकीलों ने पीड़िता को बालिग साबित करने की हर मुमकिन कोशिश की। लेकिन उम्र पर संदेह की कोई जायज वजह नहीं मिली।
8) जांच अधिकारी ने भी 60 दिन तक हर धारा पर ठोस जवाब दिए। 204 पन्नों में बयान दर्ज हुए।
आसाराम का गुनाह : इलाज के बहाने शिष्या से ज्यादती की
- आसाराम के गुरुकुल में पढ़ने वाली इस शिष्या ने अपने बयान में कहा था, ‘"मुझे दौरे पड़ते थे। गुरुकुल की एक शिक्षिका ने मेरे माता-पिता से कहा कि आसाराम से इलाज कराएं। आसाराम ने मुझे जोधपुर के पास मणाई गांव के फार्म हाउस में लाने को कहा। वहां पहुंचे तो मेरे माता-पिता को बाहर रोक दिया गया।’’
- ‘‘उनसे कहा गया कि आसाराम विशेष तरीके से मेरा अकेले में इलाज करेंगे। इसके बाद मुझे एक कमरे में भेज दिया गया। वहां पर आसाराम पहले से मौजूद था। उसने मेरे साथ अश्लील हरकतें की। साथ ही धमकी दी कि यदि मैं चिल्लाई तो कमरे से बाहर बैठे उसके माता-पिता को मार दिया जाएगा। मुझे ओरल सेक्स करने को कहा गया, लेकिन मैंने मना कर दिया।’’
दो वजह, जिनके चलते दोष साबित हुआ
1) जहां लाखों लोगों की आस्था जुड़ी होती है, उसका अपराध ज्यादा गंभीर माना जाता है।
2) जिसके संरक्षण में नाबालिग रहता है, वही उसका शोषण करे तो और भी संगीन है।
आसाराम को सख्त सजा मिलेगी, क्योंकि...
1) पॉक्सो एक्ट 2012 में नाबालिग की उम्र 16 से 18 हो गई, पीड़िता 17वें साल में थी।
2) द क्रिमिनल लॉ अमेंडमेंट 2013 में दुष्कर्म की परिभाषा बदल गई, इसलिए 376 लगी।
3) धाराएं ऐसी हैं कि कम से कम 10 साल की सजा तो होगी ही, उम्रकैद के भी प्रावधान।
4) गुजरात जेल में ट्रांसफर होगा, वहां ट्रायल पेंडिंग होने से बाहर आने की उम्मीद कम।
पिता ने कहा- हमें इंसाफ मिला
फैसले के बाद पीड़ित लड़की के पिता ने कहा कि हमें इंसाफ मिल गया। जिन्होंने हमारी इस लड़ाई में मदद की, उनका शुक्रिया। उम्मीद है कि आसाराम को कठोर दंड मिलेगा। मुझे ये भी उम्मीद है कि चश्मदीदों को भी न्याय मिलेगा।
न्यायिक और पुलिस अकादमियों में पढ़ाया जाएगा यह फैसला
- 2012 में बने पॉक्सो एक्ट और 2013 में "द क्रिमिनल लॉ अमेंडमेंट एक्ट" प्रभाव में आने के बाद ही आसाराम के खिलाफ केस दर्ज हुआ था। उसके खिलाफ आईपीसी की 376, 376(2)(f), 376(d) और पॉक्सो एक्ट की 5(f)(g)/6 व 7/8 धाराएं भी इन नए बदलावों के तहत लगी थी। ऐसे में इस केस में जो भी फैसला होगा, वह देश की न्यायिक और पुलिस अकादमियों में पढ़ाया जाएगा।
आसाराम ने साढ़े चार साल में 12 जमानत याचिकाएं लगाईं, सभी खारिज
- 1 सितंबर 2013 को गिरफ्तारी के बाद से आसाराम जेल में है। इस दौरान उसने 12 जमानत याचिकाएं लगाईं। इनमें से 6 ट्रायल कोर्ट में और तीन-तीन राजस्थान हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में खारिज हुईं। आसाराम पर गुजरात में भी दुष्कर्म का एक मामला चल रहा है।
आसाराम के दो साथी भी दोषी करार
- अासाराम के अलावा उसके सेवादार शिल्पी और शरतचंद्र को भी दोषी करार दिया गया है। इन दोनों ने लड़की को आसाराम तक पहुंचाने में मदद की थी। वे गिरोह बना कर दुष्कर्म करने की धारा 376डी के तहत दोषी साबित हुए।
- कोर्ट ने सेवादार शिवा और रसोइया प्रकाश को बरी कर दिया गया।
इसी जेल में बनी थी टाडा कोर्ट
- जोधपुर की जेल का जो हॉल कोर्ट रूम बना, उसी हॉल में 31 साल पहले टाडा कोर्ट बनी थी और कठघरे में अकाली नेता गुरचरणसिंह टोहरा खड़े थे।


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