Sunday, 3 June 2018

डीजल के पैसे नहीं थे, शव वाहन नहीं मिला तो ठेले पर शव घर ले गए परिजन | Kosar Express

तीनबत्ती से गुजरते वक्त लोग शव लेते जाते शख्स का मोबाइल पर वीडियो और फोटो शूट करते रहे। कुछ लोगों ने मदद भी की।



सागर। बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में मानवता को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है। यहां एक गरीब की मौत के बाद जब उसके परिजन डीजल के लिए रुपए नहीं दे पाए तो अस्पताल प्रबंधन ने शव वाहन ही नहीं दिया। इसके बाद मजबूर परिजन मृतक के शव को हाथ ठेले पर रखकर घर ले आए। तपती दोपहरी में करीब 2 बजे तीन बत्ती से गुजरते वक्त जब लोगों ने एक शख्स को हाथ ठेले पर शव ले जाते देखा तो कुछ लोग आगे आए और मृतक के परिजनों के लिए कुछ सहयोग राशि भी दी।


लीवर डैमेज हुआ था

- भगत सिंह वार्ड निवासी प्रकाश अहिरवार को पिछले दिनों गंभीर बीमारी की हालत में बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था। करीब 5-6 दिन इलाज चलने के दौरान शनिवार तड़के प्रकाश ने दम तोड़ दिया।

- चिकित्सकों के अनुसार प्रकाश शराब का आदी था और लीवर डैमेज हो चुका था। इलाज के दौरान तड़के प्रकाश ने दम तोड़ दिया। प्रकाश भगतसिंह वार्ड में अपने बहन-बहनोई के साथ रहता था। प्रकाश व उसके बहनोई सुरेश अहिरवार दोनों ही हाथ-ठेला चलाकर मजदूरी करते आए हैं।


मृतक के घर से आया ठेला

- मौत की खबर के बाद सुरेश बीएमसी पहुंचे और शव की सुपुर्दी लेकर नीचे आ गए। उन्हें काफी प्रयास के बाद भी शव वाहन नहीं मिला तो शव को वहीं छोड़कर बीएमसी से करीब 6 किलोमीटर दूर भगत सिंह वार्ड स्थित अपने घर पहुंचे।

- यहां से हाथ ठेला लेकर वापस बीएमसी गए और प्रकाश के शव को कंबल में लपेटकर हाथ ठेले पर रखकर अकेले ही घर की तरफ निकल पड़े।

- इस दौरान हाथ ठेले पर शव ले जाते उन्हें सैकड़ों लोगों ने देखा, लेकिन कोई भी मदद के लिए आगे नहीं आया।


रेडक्रॉस-जिला अस्पताल में है शव वाहन

जिला अस्पताल में रेडक्रॉस सोसायटी का एक शव वाहन 24 घंंटे वाहन चालक के साथ तैनात रहता है। इसके अलावा एक शव वाहन बीना रिफायनरी के माध्यम से जिला अस्पताल को प्रदान किया गया था। दो स्थायी शव वाहन यहां पर उपलब्ध हैं। जब कभी भी कोई व्यक्ति शव ले जाने के लिए शव वाहन की डिमांड करता है तो उसे यह शव वाहन उपलब्ध कराए जाते हैं।


जीवन भर हाथ ठेले से कमाया, मौत के बाद भी वही काम आया

प्रकाश ने जीवन भर हाथ ठेला चलाकर मजदूरी कर अपना व परिवार का गुजर बसर किया है। हाथ-ठेला ही उसके जीवन की सबसे बड़ी पूंजी और रोजी-रोटी का आधार रहा है। प्रकृति की नियति देखिए कि जिस हाथ ठेले ने जीवन भर उसका साथ दिया, मौत के बाद भी वही हाथ ठेला उसके काम आया। बहनोई सुरेश जो हाथ ठेला लेकर आए थे, वह प्रकाश का ही था।


एक-दूसरे पर डाल रहे जिम्मेदारी

बीएमसी: अधीक्षक डॉ. आरएस वर्मा का कहना है कि प्रकाश टीबी का मरीज था। अज्ञात के तौर पर 28 मई को भर्ती हुआ था। चार दिन तक परिजन नहीं आए। मौत के बाद उसकी बॉडी पुलिस के हैंडओवर कर मर्चूरी में रखवा दी गई। इतने में हमारी जिम्मेदारी खत्म हो गई थी।

जिला अस्पताल : सीएमएचओ डॉ. इंद्राज सिंह का कहना है कि मौत बीएमसी में हुई थी, शव को भेजने की जिम्मेदारी उन्हीं की थी। वैसे डॉ. मदन मोहन ने पीएम किया। उन्होंने भी परिजनों से बोला था कि 11 नंबर में चले जाओ, वहां शव वाहन मिल जाएगा, लेकिन वे लोग खुद ही ठेले पर शव ले गए।

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